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भविष्यवाणी करने वाले गुरु अमर बालक महाराज ने हरकी पैड़ी पर चढ़ाया दूध, बांटे लड्डू

खबर सागर

भविष्यवाणी करने वाले गुरु अमर बालक महाराज ने हरकी पैड़ी पर चढ़ाया दूध, बांटे लड्डू

 

दिल्ली स्थित ‘माँ बगलामुखी शिव शक्ति पीठ’ के साधक और माँ बगलामुखी के परम उपासक गुरु अमर बालक महाराज ने रविवार को हरिद्वार के हरकी पैड़ी गंगा घाट पर विशेष गंगा पूजन और दुग्धाभिषेक किया। इस दौरान उन्होंने माँ गंगा को दूध अर्पित किया और श्रद्धालुओं के बीच लड्डू बांटकर अपना संकल्प पूरा किया।

गुरु अमर बालक महाराज ने बताया कि पूर्व में तीन राज्यों के चुनाव परिणामों और अन्य धार्मिक मामलों को लेकर उनके द्वारा की गई आध्यात्मिक भविष्यवाणियां और गणना पूरी तरह सटीक साबित हुई हैं, जिसके आभार स्वरूप उन्होंने यह अनुष्ठान किया।

गुरु अमर बालक महाराज ने कहा, की “मैंने दिल्ली में माँ बगलामुखी का एक विशेष अनुष्ठान किया था। मेरा संकल्प था कि जब यह प्रार्थना पूरी होगी, तो मैं हरिद्वार जाकर माँ गंगा का दुग्धाभिषेक करूँगा और प्रसाद बाँटूंगा; ठीक वैसे ही, जैसे वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी जी की सफलता के लिए मैंने किया था।”उन्होंने आगे बताया कि पश्चिम बंगाल में बदलती डेमोग्राफी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने तीन राज्यों—असम, बंगाल और पुडुचेरी के लिए विशेष प्रार्थना की थी, जिसे माँ ने स्वीकार किया। उन्होंने दावा किया, “मैंने बंगाल चुनाव को लेकर भविष्यवाणी की थी कि वहाँ टीएमसी को 75 से 85 सीटें मिलेंगी, और परिणाम आने पर पार्टी को ठीक 83 सीटें प्राप्त हुईं।

इसके अलावा,बंगाल में बीजेपी के नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति को लेकर जो आकलन किया गया था, वह भी सच साबित हुआ।”राजनीतिक भविष्यवाणियों के साथ-साथ गुरु अमर बालक महाराज ने मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक ‘भोजशाला’ मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भोजशाला को लेकर जो आध्यात्मिक संकेत मिले थे, उसके अनुसार ही न्यायालय का निर्णय हमारे पक्ष (फेवरेबल) में आया है।

सनातन धर्म की महत्ता पर उन्होंने कहा कि देश के हित और भारत की सुरक्षा के लिए सनातन संस्कृति का मजबूत होना बेहद जरूरी है। सनातन ही एक ऐसा धर्म है जिसका कोई अकेला संस्थापक नहीं है, यह अजन्मा है। इसलिए जब भी हम देशहित और भारत की सुरक्षा के लिए झोली फैलाकर मांगते हैं, माँ हमें आशीर्वाद देती हैं। इस अवसर पर कई प्रमुख व्यापारी नेता और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने इस अनुष्ठान को सनातन संस्कृति की विजय बताया।

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