
खबर सागर
PDNA टीम ने मनसा देवी और काली मंदिर की पहाड़ियों का किया निरीक्षण
उत्तराखंड में हाल ही में बादल फटने और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से हुए भारी नुकसान के बाद अब पुनर्निर्माण और आपदा न्यूनीकरण की दिशा में तेज़ी से कार्य किया जा रहा है।केंद्र और राज्य सरकार की एक संयुक्त ‘पोस्ट डिजास्टर नीड असेसमेंट’ (PDNA) कमेटी ने हरिद्वार में मनसा देवी और काली मंदिर क्षेत्रों का निरीक्षण करते हुए आकलन शुरू कर दिया है।
इस दौरान PDNA कमेटी में शामिल सीबीआरआई के चीफ साइंटिस्ट अजय चौरसिया ने बताया कि कमेटी हरिद्वार में नुकसान का विस्तृत मूल्यांकन कर रही है और जल्द ही उत्तरकाशी व टिहरी जैसे अन्य प्रभावित जिलों का दौरा करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुनर्निर्माण की रणनीति बिल्ड बैक बेटर” (पहले से बेहतर निर्माण) के सिद्धांत पर आधारित होगी, जिसका लक्ष्य बुनियादी ढांचे को वैज्ञानिक रूप से इतना मजबूत करना है कि भविष्य में आपदा आने पर नुकसान न हो।
अजय चौरसिया ने कहा कि भूस्खलन की समस्या के लिए अब केवल सतही उपाय नहीं होंगे। इसके बजाय, भूस्खलन के मूल कारण की पहचान कर स्थायी समाधान किया जाएगा। आकलन के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर NDMA को सौंपी जाएगी, जिसके बाद भारत सरकार से अनुदान मिलते ही पुनर्निर्माण का कार्य शुरू होगा।
वही आपदा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने पहुंची आपदा प्रबंधन अधिकारी, हरिद्वार, मीरा केंतुरा रावत ने भी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए।
अधिकारी ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री और उच्च अधिकारियों द्वारा तत्काल निर्देश प्राप्त हुए हैं। उन्होंने सभी अधिकारियों से आपदा से हुए हर तरह के नुकसान चाहे वह निजी संपत्ति हो या सार्वजनिक की रिपोर्ट त्वरित रूप से तैयार करने का आदेश दिया। आपदा प्रबंधन अधिकारी ने प्रभावित परिवारों को आश्वासन दिया कि प्रशासन उनकी क्षतिपूर्ति के लिए गंभीर है और जल्द से जल्द क्षतिपूर्ति प्रदान करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान के आंकलन के लिए राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियाँ मिलकर न केवल वर्तमान नुकसान का आकलन कर रही हैं, बल्कि भविष्य की आपदाओं के लिए एक मजबूत और प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचा तैयार करने की दिशा में भी काम कर रही हैं।



