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हवन यज्ञ के साथ श्रीमद् भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ का समापन

खबर सागर

हवन यज्ञ के साथ श्रीमद् भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ का समापन

सात दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ ग्राम बिनाऊ व घियाकोटी में हवन यज्ञ के साथ समापन हुआ ।
पट्टी इडवालस्यूं के घियाकोटी में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत ज्ञान कथा यज्ञ के अंतिम दिन की कथा का समापन करते हुए सुप्रसिद्ध कथावक्ता शिव प्रसाद नौटियाल ने कथा का सार में वर्णन करते हुए कहा कि
दौपदी ने संत व भगवान की अंगुली कटने पर साड़ी का पलू फाड़ कर बांधी तो भगवान ने द्रोपती का चीर हरण पर लाज रखी थी ।
उन्हाने कहा कि गुरु के साथ चलने से अपितु गुरु की सेवा व चरणों में मिलती है। भगवान के चरणों में सब एक सम्मान है। और संत कृपा व नर की सेवा ही नारायण की सेवा के साथ माता पिता की सेवा ही सबसे उतम सेवा है।

कथा के समापन पर कथावाचक भावुक के साथ समापन पर भक्तों ने कथावाचक ने सभी का आभार व्यक्त किया सात दिनों में श्रवण कथा को जीवन में भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लित रहें और अपने जीवन को सार्थक बनाएं

वही ग्राम बिनाऊ में कथा के समापन पर
श्रीमद् भागवत कथा के समापन पर कथावाचक राष्ट्रीय संत लवदास महाराज जी ने कहा कि श्रीमद् भागवत की कथा व सत्संग से जीवन का उद्वार होने के साथ मार्ग प्रशस्त व बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है ।

इस मौके पर नवीन बहुगुणा,स्वरूप थपलियाल,कुशलानन्द,संदीप बधानी, सुमन लाल थपलियाल,रमेश थपलियाल, गुरु प्रसाद,
गंभीर सिंह रावत, जगमोहन सिंह, राम किशन रावत,कुशला नन्द नौटियाल, केदार दत,
आदि उपस्थित थे ।

 

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