
खबर सागर
पंच केदारों में एक तृतीय केदार भगवान् तुंगनाथ की यात्रा भारी अव्यवस्थाओं से जूझ रही है। यहाँ बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है जिससे तीर्थ यात्री भारी परेशान रहता है।
एक तरफ देश जब मंगल और चन्द्रमा जैसे ग्रहों पर जीवन जीने की सम्भावनाओं को तलाश रहे हैं वही तुंगनाथ धाम आज भी बिजली की बत्ती को मौहताज है।
आधुनिकता के इस युग में लैम्प और कांडिल के सहारे ही धाम में उजाला रहता है, सोलर लाइटे यहाँ जरूर लगी हैं किन्तु पल पल मौसम खराब होने से सोलर लाइट घंटे भर भी नहीं चलती है। वही हिन्दुत्व के नाम पर सरकारें भले ही एक बड़ा वोट बैंक हासिल करने में सफल रहती हो किन्तु तृतीय केदार तुंगनाथ के चार किमी पैदल मार्ग और धाम में एक भी शौचालय नहीं हैं ।
जिससे तीर्थयात्रियों को भारी असुविधा होती है, खासतौर पर महिला तीर्थ यात्रियों को खासी परेशानियों से दो चार होना पड़ता है। अनुमान लगाया जा सकता है कि हिन्दुत्व के नाम पर कैसे राजनीतिक रोटियां सेकी जा रही हैं।
स्थानी प्रेम बल्लभ मैठाणी, तीर्थ पुरोहित तुंगनाथ कहते है की
धाम में स्वास्थ्य सेवायें के नाम पर एक बुखार की गोली तक नहीं मिलती है।
कई बार आकाशीय बिजली गिरने कई तीर्थ यात्री व स्थानीय लोग गंभीर रूप से घायल हो गए किंतु स्वास्थ्य सेवाएं होने से उन्हें प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल पाया। जबकि मरीजों को धाम से 4 किलोमीटर नीचे सड़क मार्ग चोपता लाने के लिए भी कोई साधन नहीं है।
स्वास्थ सेवा के नाम पर तुंगनाथ धाम के बेस कैम्प चोपता में जरूर एक चिकित्सा इकाई टीन शेड में चल रही है किन्तु मरीज से ज्यादा चिकित्सा इकाई बीमार हो रखी है।
कृष्ण बल्लभ मैठाणी, तीर्थ पुरोहित का कहना है कि
तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ में बुनियादी सुविधाएं न होने का सबसे बड़ा कारण यह क्षेत्र सेंचुरी एरिया बताया जा रहा है ।
जिससे यहां वन विभाग किसी भी तरह से निर्माण कार्य होने नहीं देता है। हालांकि केदारनाथ धाम में दर्जनों हेली सेवाओं की उड़ान धड़ले से सेंचुरी एरिया की धज्जियां उड़ा रहे हैं किंतु वहां के लिए कोई नियम कायदे मायने नहीं रखते हैं ।
जबकि तुंगनाथ धाम में एक पानी की लाइन भी बिछाई जाती है तो तमाम कायदे कानून सामने आ जाते हैं। ऐसे में समझा जा सकता है कि हमारे धामों के प्रति सरकारों का कैसा दोहरा रवैया है।



