
खबर सागर
कुमाऊनी ऐपण गर्ल’ की राखियां विदेशों में धूम,भारी डिमांड
कुमाऊनी ऐपड़ गर्ल मीनाक्षी खाती की राखियां इन दोनों देश ही नहीं विदेशों में भी धूम मचा रही है। विदेशों से भी आ रही है भारी मांग एप्पल वाक्य पर संजीवनी का कार्य कर रही है
कुमाऊं में ऐपड़ गर्ल के नाम से प्रसिद्ध कुमाऊनी ऐपड़ गर्ल मीनाक्षी खाती की राखियां देश के साथ ही विदेश में भी परचम ला रही है, मीनाक्षी की ऐपड़ वाली राखियों की डिमांड विदेशों से भी आ रही है,नैनीताल जिले के रामनगर के छोई गांव की मीनाक्षी खाती जो प्रदेश में ऐपण गर्ल के नाम से जानी जाती हैं ।
उन्होंने राखी के मध्यम से ऐपण को नई पहचानदेने की पहल की है। साथ ही मीनाक्षी कुमाऊं की संस्कृतिऐपड़ को भी संरक्षित करने का कार्य लंबे समय से कर रही है।
हमेशा से ही देवभूमि उत्तराखंड की कला और संस्कृति लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती रही है,जो उत्तराखंड की पहचान बन चुकी हैं,इसी में से एक ऐपण कला भी है,समय के साथ जो अब रोजगार का साधन भी बनता जा रहा है। वहीं रामनगर की मीनाक्षी खाती जो प्रदेश में ‘ऐपण गर्ल’ के नाम से जानी जाती हैं ।
उन्होंने राखी के मध्यम से ऐपण को नई पहचान देने की पहल की है,आपको बता दें कि मीनाक्षी ने कुमाऊंनी भाषा में लिखी ऐपण की राखियां बनाई हैं, जो ईजा,भों,ददा,भूली, भाई,बौजू, दादी,अम्माऔर बुबु आदि नाम से हैं ।
इन राखियों को उत्तराखंड ही नहीं बल्कि विदेशों के लोग भी पसंद कर रहे हैं, विदेशों से भी मीनाक्षी को सैकड़ों ऑर्डर आ रहे हैं।
मीनाक्षी लगभग 500 से ज्यादा रियो के आर्डर विदेश में अब तक दे चुकी है जिसमें कैलिफोर्निया, अमेरिका ,आस्ट्रेलिया आदि बड़ी फ़ौरन कंट्री से मीनाक्षी के पास लगातार आर्डर आ रहे है।
बता दें कि, ऐपण को मूलरूप से गेरू (लाल मिट्टी) और बिस्वार (पीसे चावल में पानी मिलाकर तैयार लेप) से तैयार किया जाता है।
उत्तराखंड में हर मांगलिक कार्यों में ऐपण से घरों और मंडप को सजाने की परंपरा है। बाद में रेडीमेड स्टीकर ने ऐपण का रूप ले लिया। ऐपण कुमाऊं की लोक चित्रकला की शैली हैI
जो अपनी अलग पहचान बना चुकी है।
मीनाक्षी के साथ इस मुहीम में जुड़कर कई महिलाएं स्वरोजगार से भी जुड़ गई है।
मीनाक्षी की यह राखियां लोग सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफार्म पर मीनाकृति ऐपड़ स्टोर के माध्यम से आर्डर देकर मंगवा सकते है या फिर मीनाक्षी खाती के स्टोर रामनगर के छोई क्षेत्र से भी खरीद सकते है।



