
खबर सागर
बुग्यालों में गूंजा दाती पर्व त्यौहार धार्मिक हर्ष उल्लास के साथ मनाया
ऊंच हिमालयी बुग्यालों में छह माह तक भेड़-बकरियों के साथ प्रवास करने वाले भेड़ पालकों का पारंपरिक दाती त्यौहार हर्षोल्लास एवं धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। सावन माह के अन्तिम सप्ताह में आयोजित होने वाला यह लोकपर्व हिमालयी पशुपालक संस्कृति, देव आस्था और सदियों पुरानी परंपराओं का जीवंत प्रतीक माना जाता है।
बुग्यालों में प्रवास कर रहे भेड़ पालकों ने देव पूजन कर सुख-समृद्धि एवं पशुधन की कुशलता की कामना की।
दाती पर्व के अवसर पर भेड़ पालकों ने विधि-विधान से स्थानीय देवी-देवताओं का पूजन-अर्चन किया , इसके बाद भेड़-बकरियों के सेनापति की नियुक्ति की पारंपरिक रस्म निभाई गई।
पशुधन की सुरक्षा, बुग्यालों में विचरण और झुंड के संचालन में सेनापति की विशेष भूमिका मानी जाती है। इस दौरान भेड़ पालकों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का निर्वहन करते हुए देवताओं से अपने पशुधन की रक्षा का आशीर्वाद मांगा।
भेड़ पालक वीरेन्द्र धिरवाण ने बताया कि दाती त्यौहार को पशुपालक समाज की प्राचीन परंपराओं से जोड़कर देखा जाता है। प्रत्येक वर्ष सावन माह के अन्तिम सप्ताह में ऊंच हिमालयी बुग्यालों में इस पर्व का आयोजन किया जाता है।



