
खबर सागर
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व
में जिप्सियों के संचालन लॉटरी के माध्यम से निकाली
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में जिप्सी संचालन को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। लॉटरी प्रक्रिया अपनाते हुए 37 जिप्सियों को एक साल के लिए बाहर कर दिया गया है, लेकिन इस लॉटरी सिस्टम पर अब सवाल भी उठने लगे हैं।
रामनगर स्थित कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में जिप्सी संचालन को लेकर पार्क प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है।
निर्धारित क्षमता से अधिक वाहनों के पंजीकरण के चलते 37 जिप्सियों को एक वर्ष के लिए पार्क से बाहर कर दिया गया है।
यह चयन कोसी रेंज स्थित वन विश्राम गृह में लॉटरी सिस्टम के माध्यम से किया गया।
इस प्रक्रिया में कुल 130 जिप्सियों में से 93 को संचालन की अनुमति मिली, जबकि 37 जिप्सियां बाहर हो गईं। इनमें ईडीसी श्रेणी की 66 में से 50 और खुली श्रेणी की 64 में से 43 जिप्सियों को लॉटरी के जरिए अंदर रखा गया।
नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के मानकों के अनुसार कॉर्बेट के विभिन्न जोनों में अधिकतम 385 जिप्सियों के संचालन की अनुमति है, जबकि वर्तमान में 400 से अधिक जिप्सियां पंजीकृत हैं। ऐसे में क्षमता संतुलन बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया।
डिप्टी डायरेक्टर राहुल मिश्रा के अनुसार, पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की गई और जिप्सी स्वामियों से ही पर्चियां निकलवाई गईं।
चयनित न होने वाली 37 जिप्सियों को अगले एक साल तक संचालन की अनुमति नहीं मिलेगी।
हालांकि, इस निर्णय के बाद विवाद भी सामने आने लगा है। जिप्सी स्वामी अमित अग्रवाल ने लॉटरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ श्रेणियों को बाहर रखकर पूरी तरह निष्पक्षता नहीं बरती गई। उन्होंने आरोप लगाया कि 3 और 5 वर्ष वाले जिप्सी स्वामियों को प्राथमिकता देकर अन्य के साथ भेदभाव किया गया है।
अमित अग्रवाल ने यह भी कहा कि वे इस मामले को हाईकोर्ट में ले जाएंगे और सभी जिप्सियों के लिए समान रूप से लॉटरी लागू करने की मांग करेंगे। वहीं नमित अग्रवाल ने भी पूर्व में दर्ज आपत्तियों का हवाला देते हुए प्रशासन पर नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया।
दूसरी ओर सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र शर्मा ने कहा कि बाहर हुई 37 जिप्सियों के स्वामियों को वैकल्पिक रोजगार से जोड़ने के लिए प्रशासन से बातचीत की जाएगी।
वहीं कॉर्बेट के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने स्पष्ट किया कि पूरी लॉटरी प्रक्रिया नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत ही संपन्न कराई गई है और आगे भी सभी निर्णय नियमानुसार ही लिए जाएंगे।



