
खबर सागर
हरूंता बुग्याल में हरि महाराज की शैल यात्रा, दर्शन कर मांगी समृद्धि का आशीर्वाद
उत्तरकाशी के बाड़ागड्डी क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति, देव परंपरा और प्रकृति का अद्भुत संगम एक बार फिर हरूंता बुग्याल में देखने को मिला। प्रसिद्ध लोकदेवता हरि महाराज एवं हूंण देवता की दो दिवसीय पारंपरिक शैल यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कठिन पैदल यात्रा कर बुग्याल पहुंचकर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की।
इस दौरान देव डोली के साथ पारंपरिक रासू नृत्य, लोकगीतों और जयघोषों से पूरा बुग्याल भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।
स्थानीय परंपरा के अनुसार हर वर्ष आयोजित होने वाला यह बिहार मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पहाड़ की लोकसंस्कृति, पशुधन संरक्षण और प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक माना जाता है।
बुग्यालों में गर्मियों के दौरान चरने वाली गाय, भैंस, बैल और अन्य पशुओं की सुख-समृद्धि, सुरक्षा तथा पूरे क्षेत्र की खुशहाली की कामना के लिए श्रद्धालु हरि महाराज का दूध और दही से अभिषेक करते हैं। मान्यता है कि देवता प्रसन्न होकर पशुधन को रोगों और प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखते हैं तथा क्षेत्र में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
करीब 15 से 16 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक साधना के साथ प्रकृति से जुड़ने का भी अनूठा अवसर होती है।
हरे-भरे बुग्याल, घने जंगल, हिमालय की मनोरम चोटियां और शांत वातावरण इस यात्रा को किसी तीर्थ से कम नहीं बनाते। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस शैल यात्रा में शामिल होने का पुण्य किसी बड़े धाम की यात्रा के समान माना जाता है।
गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान भी शैल यात्रा में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि हरि महाराज के आशीर्वाद से उन्हें लगातार दूसरी बार इस पवित्र यात्रा में सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि बुग्यालों में रात्रि विश्राम और प्रकृति की गोद में बिताए पल जीवनभर याद रहने वाले अनुभव हैं। विधायक ने देव डोली के साथ पारंपरिक रासू नृत्य में भी भाग लिया और स्थानीय लोगों के साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का आनंद लिया।
स्थानीय निवासी संतोष मराठा ने बताया कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भी हरि महाराज का आशीर्वाद विधायक सुरेश चौहान को प्राप्त हुआ था। उनका मानना है कि इस बार भी देवताओं का विशेष आशीर्वाद उन्हें मिला है। वहीं क्षेत्र के अनेक लोगों का कहना है कि विधायक वर्षों से इस यात्रा में श्रद्धापूर्वक शामिल होते रहे हैं।

हरूंता बुग्याल की यह पौराणिक शैल यात्रा आज भी पहाड़ की जीवंत लोक परंपराओं, प्रकृति संरक्षण, पशुधन के महत्व और सामुदायिक एकता का अनुपम उदाहरण है। आधुनिक दौर में भी यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत और देव परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है।



