खबर सागर
भगवान की कथा व सत्संग से जीवन मार्ग होता प्रशस्त
विश्व शक्ति योग जन सेवा समिति के द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के तीसरे दिन की कथा में कथावाचक संत लवदास ने हिरण्यकश्यप व प्रहलाद की कथा का सारांश अद्भुत और रोमांचक कथा में भारी भीड उमड रही ।
रविवार को रांइका नैनबाग के मैदान में श्रीमद् भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ की तीसरे दिन कथा
में व्यास संत लवदास जी हिरण्यकश्यप-प्रह्लाद की कथा सुनाई का सार सुनाते हुए हिरण्यकश्यप ने अपने भाई हिरण्याक्ष का वध भगवान वाराह से होने का बदला लेने के लिए कठोर तप किया। ब्रह्मा जी से वरदान मांगा न दिन में न रात में, न घर में न बाहर, न अस्त्र
हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद गर्भ से ही नारद जी के उपदेश से विष्णु भक्त था। पाठशाला में गुरु के बेटे उसे पढ़ाते तो प्रह्लाद दूसरे बच्चों को “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय जपना पिता को यह पसंद न आया।
इस मौके पर संत बालक दास, आचार्य कपिल सेमवाल, रोहित मिश्रा, दीपक नौटियाल, नितिन बिरेंद्र गौड़,मोहन लाल नौटियाल, बिरेन्द्र दत्त, शरण सिंह पंवार, बचन सिंह रावत, नागेन्द्र पुण्डीर,सीमा देवी, मीरा देवी, बीनों देवी,जया देवी, पप्पा देवी, गजीरा देवी, नवीन रावत, अरविद कंडारी आदि उपस्थित थे।



