खबर सागर
रोज 14 किमी की दूर नापकर पैदल रांइका रोसाल पंहुचते छात्र छात्राएं
छात्र छात्राओं ने मुख्यमंत्री से की स्कूल वाहन की मांग
चंपावत जिले के लोहाघाट ब्लॉक के नेपाल सीमा से लगी ग्राम सभा सुल्ला ,
पासम व नगरू घाट के छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए कई किलोमीटर की पैदल दूरी नापकर जीआईसी रोसाल पहुंचना पड़ता है।
स्कूल जाने के दौरान छात्र-छात्राओं को जंगल के कच्चे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। जिसमें छात्र-
छात्राओं के लिए बरसात व गर्मी के सीजन में कई दिक्कतें होने पर हमेशा जंगली जानवरों व जहरीले सांपों का डर बना रहता है।
जिस कारण अभिभावकों की भी चिंता बनी रहती है। छात्र छात्राओं ने बताया उन लोगों की सबसे बड़ी समस्या विद्यालय आने-जाने की है ।
कहा उन्हें रोज 12 से 14 किलोमीटर की पैदल दूरी विद्यालय आने-जाने के दौरान पैदल तय करनी पड़ती है। जिसमें उन्हें काफी कठिनाई होती है तथा वह कभी कभी समय पर विद्यालय भी नहीं पहुंच पाते है। उन्होंने कहा जंगल के रास्ते में उन्हें जंगली जानवरों का काफी डर लगा रहता है। छात्र-छात्राओं ने मुख्यमंत्री धामी तथा जिलाधिकारी चंपावत से स्कूल बस की मांग की है। इसे गंभीर समस्या को लेकर पासम के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि चंद्रकांत तिवारी तथा सुल्ला के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि त्रिलोक सिंह के द्वारा जिलाधिकारी चंपावत मनीष कुमार को बच्चों की समस्या को लेकर ज्ञापन दिया गया तथा जिलाधिकारी से विद्या वाहिनी योजना के तहत सीमांत क्षेत्र के बच्चों के लिए स्कूल वाहन की व्यवस्था करने की मांग की गई। दोनों जन प्रतिनिधियों ने बताया पासम और नगरूघाट के बच्चों को रोज विद्यालय आने-जाने में लगभग 14 किलोमीटर की दूरी तथा सुल्ला के बच्चों को लगभग 12 किलोमीटर की दूरी जंगल के कठिन चढ़ाई भरे रास्तों से पैदल तय करनी पड़ती है। रास्ते में दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
चंद्रकांत तिवारी व त्रिलोक सिंह ने जिलाधिकारी से जिस प्रकार से लेटी डुंगरा व जिले के अन्य विद्यार्थियों के लिए स्कूल वाहन की व्यवस्था की गई है उसी प्रकार उनके क्षेत्र के बच्चों के लिए भी स्कूल वाहन की व्यवस्था करने की मांग की है राजू उनकी समस्या का समाधान हो सके। कहा उन्हें पूरा विश्वास है मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा जिलाधिकारी चंपावत छात्र-छात्राओं की समस्या का संज्ञान लेंगे तथा समस्या का जल्दी समाधान किया जाएगा। मालूम हो सुल्ला व पासम जिले के नेपाल सीमा से सटे हुए क्षेत्र है जहां आज भी सुविधाओं का काफी अभाव है।



