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कैम्पटी रेंज में प्लांटेशन के नाम पर सरकारी रुपयों का दूरुपयोग

खबर सागर

कैम्पटी रेंज में प्लांटेशन के नाम पर सरकारी रुपयों का दूरुपयोग

नैनबाग (शिवांश कुंवर)-
मसूरी वन प्रभाग के कैम्टी रेंज में वृक्षारोपण के पौधे जगह जगह जंगलों में लावरिश फेंकेने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। जिसमें सिलेसु जंगलों के बाद अब बंदरकोट क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में पौधे मिलने से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वन प्रभाग मंसूरी के तहत कैम्टी रेंज में दर्जनों प्लाटेशन का रोपण होने अधिकांश प्लाटेशन में खाना पूर्ति व कागजों में दर्शाया गया है।
जिसका नतिजा जगह जगह पौधे लावरिश की तरह फेंके जाने से आम जनता का रोष बढता जा रहा है।और सीधे-सीधे वन विभाग की घोर लापरवाही को दर्शाते हुए सरकारी धन का दुरुपयोग भी है।

वही स्थानीय निवासी रमन रावत सिंह आदि ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कांडी क्षेत्र के अंतर्गत दोहरे खाले नामें तोक में प्लांटेशन कार्य किया गया। लेकिन इसमें भारी अनियमितता बरती जाने पर विभाग द्वारा केवल कुछ सैकड़ों पौधों का ही रोपण किया गया, जबकि शेष पौधों को जंगल में ही लावारिस हालत में फेंक दिया गया। यदि समय रहते इन पौधों का सही तरीके से रोपण किया जाता, तो क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य को पूरा किया जा सकता था।
इस मामले में स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश जताते हुए प्लांटेशन मात्र कागजों में ही दर्शाया गया है । जिसकी अन्य विभाग से प्लांटेशन कार्यो की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर कितने पौधे आए, और कितनों का रोपण हुआ और बाकी पौध को क्यों फेंका गया।

सिलेशु जंगल क्षेत्र में फेंकी गई पौध के मामले को गंभीरता से लेते हुए विभाग द्वारा विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार अन्य क्षेत्रों में भी इस प्रकार की लापरवाही सामने आ रही है, जिसकी जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता या दोषी पाए जाते हैं, तो सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
( अमित कंवर,डीएफओ मंसूरी डिवीजन)

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