
खबर सागर
योग से तन-मन व निरोग रहने की कला दुनिया भी मान रही है
हरिद्वार में योग पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय और योगा है,बिटेट शिकागो के बीच एमओयू किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने वर्तमान समय में उपचार में योग का महत्त्व बताते हुए कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में भारत की इस प्राच्य विद्या का लोहा आज पूरी दुनिया मान रही है।
न्यूरो योगा एंड कांसेशनेस स्टडी विषय पर आयोजित 12वीं अंतर्राष्ट्रीय कान्फ्रेंस में संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने कहा कि चेतना आज भी विज्ञान के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। पतंजलि योग और उपनिषदीय ज्ञान हमारी मस्तिष्क संबंधी अनेक गुत्थियों को सुलझाता है।
मुख्य अतिथि अंतरविश्वविद्यालय योग शिक्षण केंद्र नई दिल्ली के निदेशक प्रो अविनाश पांडेय ने योग में हो रहे शोधों की उत्कृष्टता पर बल दिया।
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के योग विभाग के डीन और के.सं.वि.वि. के श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर के निदेशक प्रो.पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने बतौर विशिष्ट अतिथि कहा कि ऐसी संगोष्ठियों का योग के ज्ञान के आदान-प्रदान में महत्त्वपूर्ण योगदान होता है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में गहराई तक धंस चुके लोग योग की शरण में आने को मजबूर हो गए हैं। यही योग की असली शक्ति है।
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार के कुलपति प्रो रमाकांत पांडेय ने कहा कि योग ऐसा महासमुद्र है,जिसकी गहराई में गोता लगाने से अनेक रत्नों की प्राप्ति होती है।
इस कार्यक्रम में श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर के योग विज्ञान विभाग के प्राध्यापक डॉ सुधांशु वर्मा एवं 50 छात्रों एवं शोधार्थियों ने प्रतिभाग किया। इसमें लगभग 50 शोध पत्र पढ़े गए और लगभग 15 देशों के प्रतिभागियों ने प्रतिभाग लिया।
कार्यक्रम में प्रो दिनेश चमोला,प्रो लक्ष्मीनारायण जोशी,मनोज गहतोड़ी आदि उपस्थित थे।



