
खबर सागर
महाशिवरात्रि पर्व पर जौनपुर के शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए उमड़़ी भीड़
न आदि न अंत है, शिव ही अनंत महाशिवरात्रि जौनपुर के शिव मंदिरों में श्रद्वालुओं ने पूजा अर्चना वेल पत्री व जलाभिषेक कर सुवः समृद्वी की कामना की है।
सनातनी परंपरा का महा पर्व महाशिवरात्रि पर भारी संख्या में पौराणीक द्वारिकापुरी शिव मंदिर भूटगांव,टिकरी, कोड़ी व मुख्य बाजार थत्यूड़ आदि मंदिरों में बाबा केदार नाथ, भोले बम्ब- बम्ब महादेव आदि के नारों मंदिरो गुंज उठा ।
और प्रातः से ही श्रद्वालुओं की भीड़ उमड़ी । जिसमें श्रद्वालुओं ने शिव लिंग पर वेल, पत्री, पृष्प व जलाभिषेक कर भोल से सुख: शांती और समृद्धि की प्रार्थना की है।
आचार्य नरेश नौटियाल ने बताया कि यह शिवरात्री पर्व एक त्यौहार नहीं, बल्कि एक ब्रह्मांडीय घटना (Cosmic Event) रात्रि है,जो सामान्य रात्रियों की तरह केवल ‘अंधेरा’ नहीं लाती, बल्कि अज्ञान की नींद से जगाकर ‘शिवत्व’ के प्रकाश की ओर ले जाती है।
महाशिवरात्रि का अर्थ है-: शिव की महान रात्रि। पुराणों और श्रुतियों के अनुसार शिव-शक्ति का मिलन: यह वह रात्रि है जब वैराग्य के प्रतीक ‘शिव’ और शक्ति की प्रतीक ‘माँ पार्वती’ का विवाह हुआ था। यह जड़ और चेतन, पुरुष और प्रकृति के संतुलन का उत्सव है।
उन्होने बताया कि यह लिंगोद्भव: इसी रात भगवान शिव निराकार से साकार रूप में (लिंग रूप में) प्रकट हुए थे। तभी से महाशिव रात्री का पर्व पूरी आस्था व श्रद्वा के धूमधाम से मनाई जाती है।



