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सुरक्षित इन्टरनेट एवं एआई की सार्थक उपयोगिता पर कार्यशाला संपन्न‘

खबर सागर

‘सुरक्षित इन्टरनेट एवं एआई की सार्थक उपयोगिता पर कार्यशाला संपन्न‘

‘सेफर इन्टरनेट दिवस’ के अवसर पर क्रीड़ा विभाग के सभागार (निकट विकास भवन), नई टिहरी में सुरक्षित इन्टरनेट के उपयोग एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की सार्थक उपयोगिता विषय पर एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य कार्यालय कार्मिकों एवं आमजनमानस को इन्टरनेट के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक करना तथा सामान्य साइबर अपराधों के प्रति संवेदनशील बनाना रहा।

जिला सूचना विज्ञान अधिकारी कुसुम ने एआई के तहत डीप फेक वीडियो, वॉयस क्लोनिंग, चैटवोट्स आदि के साथ ही ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग अटैक, डेटा चोरी, सोशल मीडिया से जुड़े जोखिमों एवं उनसे बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उनके द्वारा सुरक्षित पासवर्ड, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण, संदिग्ध लिंक एवं संदेशों से बचाव तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा आदि के बारे में बताते हुए मजबूत पासवर्ड का उपयोग करने, ओटीपी और पासवर्ड किसी को साझा न करने, अपने एकाउंट्स पर नियमित निगरानी रखने, कार्ड की फोटो और विवरण सोशल मीडिया पर साझा न करने, मोबाइल से अनउपयोगी एप्स को हटाने तथा एप केवल अधिकारिक स्रोत (गूगल प्ले स्टोर, एप्पल एप स्टोर) से ही डाउनलोड करने की सलाह दी गई। ऑनलाइन शॉपिंग स्कैम की जानकारी देते हुए फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया पेज पर भारी छूट के लालच में न आने तथा जहां तक सम्भव हो केश ऑन डिलीवरी को अपनाने की सलाह दी गई।

इसके साथ ही एआई के सकारात्मक उपयोग एवं दुरुपयोग से होने वाले संभावित खतरों एवं उनसे सतर्क रहने की जानकारी दी गई। बताया गया कि किस प्रकार एआई का उपयोग शासकीय कार्यों, सूचना प्रबंधन, जनसुविधाओं को अधिक प्रभावी बनाने आदि में किया जा सकता है। उनके द्वारा रिमोट एक्सेस स्कैम (एनी डेस्क, टीम व्यूअर, क्विक सपोर्ट) का उपयोग न करने, सॉफ्टवेयर को नियमित रूप से अपडेट करने तथा ऑटो अपडेट की सुविधा को चालू रखने की सलाह दी गई, ताकि सुरक्षा पैच अपने आप इंस्टॉल हो सके।

पुलिस विभाग से धनराज बिष्ट ने साइवर सुरक्षा की जानकारी देते हुए अंडर 18 छात्र-छात्राओं को सोशल मीडिया साइट पर एकांउट्स न बनाने की सलाह दी। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेट फॉर्म पर अपने डॉक्यूमेंट्स शेयर न करने, किसी अनजान से बात न करने, किसी की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करने तथा किसी को ओटीपी शेयर न करने को कहा गया। डिजीटल रूप से धोखाधड़ी होने पर तुरन्त अपना पासवर्ड बदलने और तत्काल डिजीटल अरेस्ट स्कैम नम्बर 1930 पर कॉल करने को कहा गया।

कार्यशाला में अपर जिलाधिकारी टिहरी अवधेश कुमार सिंह, जिला विकास अधिकारी मो. असलम सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

 

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