खबर सागर
आत्मनिर्भर के साथ अन्य महिलाओं को दे रही स्वरोजगार व निरोग का संदेश
नैनबाग – मोहन थपलियाल –
महिलाएं स्वयं आत्म निर्भर बनाने के साथ अन्य को भी स्वरोजगार के अवसर प्रदान कि दिशा में लगातार स्वरोजार के क्षेत्र में अपनी आजिविका को मजबूत करती आ रही है। साथ ही जैविक उत्पादक खाघ पदार्थ का प्रयोग कर स्वास्थ्य व निरोग रहने की सलाह भी दे रही है।

प्रखंड जौनपुर कैम्टी क्षेत्र की निवासी पवित्रा चौहान हिमालय हाट के नाम से जैविक (आर्गेनिक ) विभिन्न स्थानीय उत्पादक को तैयार कर स्थानीय बाजार व प्रदेश की मांग पर खूब बिक रहा है।
जिसमें प्रति माह में 8 से 10 हजार रुपयें की आय अर्जित कर स्वयं आत्मनिर्भर की ओर विगत 4 सालों से आगे बढ़ने के साथ गांव की दर्जनों महिलाओं को स्वरोजार के क्षेत्र में जोड रही है।
पवित्रा चौहान विभिन्न गांव की महिलाओ से आर्गेनिक मडुवा, झंगोरा, हल्दी, धनियां, लहसन, टिमरू, मैथी, सरसों आदि खाद्य पदार्थो को बाजार से जादा किमत में खरीद करते है।
जहा सभी आर्गेनिक खाद्य पदार्थी को सावधनी पूर्वक के साथ तैयार करते है। जिसमें चाची का नमक व चाट मसला गर्म मसाला में ग्याहरा जड़ी बूटी आदि के मिश्रण से बनाया जाता है। इसीमें हल्दी, गेंहू की नमकीन, कड़ी पत्ता, लहसन मसाला, राजमा मससाला, टिमरू मसाला,ऑवला आचार, लहसन का अचार, पाचन चूर्ण,मक्की के लड्डू, आलु चिप्स, व शीतों प्लाजी खांसी के लिए, सीनेम, संस्कारित हल्दी एवं सौन्द्रीयकरण में क्रीम
त्वाचा के लाभाकारी जैसी पदार्थों की पंकिंग कर तैयार किया जाता है।
जो कि कैम्टी, मंसूरी, देहरादून व दिल्ली जैसे बाजार में काफी मांग है। साथ स्थानीय स्तर पर भी जादा मांग बढ़ने लगी है।
सुमित्रा चौहान का कहना है कि
2012 में काम करना शुरू करते हुए मेरा उद्देश्य है कि गांव के जैविक (आर्गेनिक) उत्पादक ग्रामीण स्वयं प्रयोग के बाद शेष को प्रोडक्ट के माध्यम से बाजार में उतरे । उन्होंने कहा ग्रामीण मंडावा, मक्का, झंगोरा आदि उत्पादक बाजार में भेज देते हैं । और वहां से केमिकल युक्त खाद्य पदार्थ को अपने प्रयोग में करते हैं जो कि स्वास्थ्य व शरीर के लिए बहुत हानिकारक है ।
जिस पर इसी को लेकर हिमालय हॉट ग्रामीण महिलाओं को जागरुक कर जागरूक कर आर्गेनिक खाद्य पदार्थों का प्रयोग कर स्वयंवर आने वाली पीढ़ी को भी स्वस्थ बनाएं ।
जिसमे हिमालय हाट हारा लगभग 20 उत्पादक को पैकिंग कर दूर बाजार सहित स्थानीय स्तर पर काफी डिमांड है, जो की धीरे-धीरे इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है ।



