
खबर सागर
सरकारी अस्पताल को पीपीपी मोड से हटाने की मांग तेज
उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा एक बार फिर चर्चा में है। रामनगर के सरकारी अस्पताल को पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड से हटाने की मांग को लेकर स्थानीय लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस बार जनता ने सीधा मोर्चा खोलते हुए 24 घंटे के अन्न-जल त्याग अनशन की शुरुआत की है।
वर्ष 2020 में उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के कुछ सरकारी अस्पतालों को पीपीपी मोड पर देने का निर्णय लिया था, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की बात कही गई थी ।
लेकिन रामनगर का सरकारी अस्पताल पीपीपी मोड में जाने के बाद से ही विवादों में घिर गया। स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का आरोप है कि जब से अस्पताल को निजी हाथों में दिया गया है, तब से यहां की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं।
हालत यह है कि इलाज के नाम पर मरीजों को या तो रेफर कर दिया जाता है या फिर पर्याप्त उपचार न मिलने के कारण मरीज दम तोड़ देते हैं।
गौरतलब है कि इस अस्पताल को पीपीपी मोड से हटाने की मांग कई वर्षों से उठ रही है। जनता ने कई बार धरना-प्रदर्शन किया, लेकिन हर बार सरकार सिर्फ आश्वासन देकर पीछे हट जाती है।
बात यहां तक पहुंच गई कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत तक को जनता और भाजपा कार्यकर्ताओं ने यह मांग सीधे तौर पर रखी थी,तब स्वास्थ्य मंत्री ने सार्वजनिक रूप से अस्पताल को पीपीपी मोड से हटाने का वादा किया था,लेकिन अब तक कुछ नहीं बदला,जबकि उत्तराखंड के अन्य सरकारी अस्पतालों को पीपीपी मोड से हटा दिया गया है, रामनगर का अस्पताल अब भी उसी ढर्रे पर चल रहा है।
पूर्व ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं,उनका कहना है कि सरकार और स्वास्थ्य मंत्री जनता से सिर्फ झूठ बोल रहे हैं,उन्होंने कहा था कि मार्च में अस्पताल को पीपीपी मोड से हटा दिया जाएगा, लेकिन अब सुनने में आ रहा है कि इसे फिर से तीन महीने के लिए बढ़ाया जा रहा है। यही कारण है कि जनता अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है।
आज के प्रदर्शन में प्रदेश के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। रामनगर की जनता का कहना है कि यदि इस बार भी सरकार ने उनकी मांगों को अनसुना किया, तो मार्च के बाद एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
इस अनशन को नगर पालिका अध्यक्ष हाजी मोहम्मद अकरम ने भी अपना समर्थन दिया है।
उन्होंने मांग की है कि इस अस्पताल को तुरंत पीपीपी मोड से हटाया जाए और इसे दोबारा सरकारी तंत्र के तहत लाया जाए, ताकि आम जनता को सही स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
जनता का सीधा सवाल है। जब उत्तराखंड के अन्य सरकारी अस्पतालों को पीपीपी मोड से हटा दिया गया, तो फिर रामनगर के अस्पताल के साथ ऐसा अन्याय क्यों।
अब देखना होगा कि सरकार इस 24 घंटे के अनशन के बाद क्या निर्णय लेती है, या फिर जनता को एक और बड़े आंदोलन की ओर बढ़ना पड़ेगा।



