
खबर सागर
बक्फ बोर्ड संशोधन को लेकर नाराज़गी, राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
केन्द्र सरकार द्वारा पार्लियामेंट में वक्फ एक्ट 2013 को संशोधन के साथ नया वक्फ संशोधन बिल 2024 में पेश होने के बाद सदन में हंगामा होने के बाद संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) भेजा गया है।
जिसमे मुस्लिम धर्मगुरुओं द्वारा इसमे आपत्ति दर्ज करते है एक ज्ञापन डीएम के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम भेजा है।
जिसमे उन्होंने राष्ट्रपति से मांग की है कि अब जबकि ज्वाइन्ट पार्लिमेन्ट कमेटी ने इस बिल पर आपत्ति (एतराजात) तलब किये है, हम मुसलमानाने ऊधमसिंहनगर इस वक्फ संशोधन बिल का पुरजोर विरोध करते हैं. और आपसे विनम्र अनुरोध करते हैं कि इस बिल को केन्द्रीय हुकूमत वापस ले और वक्फ एक्ट 2013 ही को यथावत बहाल रखा जाए।
साथ ही ये भी मुतालबा करते हैं कि जिन वक्फ की जमीनों पर जो कि हजारो करोड़ की सम्पत्ति है हुकूमत उन जायदादों को अवैध कब्जेदारों से खाली कराये ताकि उसका फायदा गरीबों यतीमों, मिस्कीनो, बेवाओं को मिल सके। आरोप लगाते हुए कहा कि यह संशोधन बिल जब से पार्लिमेन्ट में पेश किया गया है इसे लेकर भारत के मुसलमानों में बहुत बेचौनी, तकलीफ और गहरा रोष है।
इस सशोधन बिल के जरिये केन्द्र की सरकार मुस्लिम वक्फ जायदादों की हैसियत और नोइयत को बदल देना चाहती है। ताकि इनपर कब्जा करके बक्फ की हैसियत को खत्म करना आसान हो जाए।इस तरह से केन्द्रीय सरकार वक्फ संशोधन बिल लाकर मुसलमानों के धार्मिक मामलात में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रही है।
जबकि मुसलमान हर नुकसान बर्दाश्त कर सकता है, लेकिन उसके दीन में, शरीयत में कोई हस्तक्षेप करे हरगिज बर्दाश्त नहीं कर सकता।
भारत के संविधान ने हर नागरिक को धार्मिक आजादी के साथ जीने का मुकम्मल अधिकार दिया है जबकि हुकूमत इस संशोधन बिल के द्वारा इस धार्मिक आजादी को छीन लेना चाहती है। जिससे देश के सेकुलर ढांचे को नुकसान पहुंच रहा है।



