
खबर सागर
उत्तराखण्ड की लोक संस्कृती में कुलाऊँ में आटूं महापर्व की मची धूम
बागेश्वर जिले के कुलाऊँ गांव में हर 5 साल में माँ नंदा को याद को किया जाता है ।
इसी कड़ी में आज कुलाऊँ गांव मै एक दिवसीय माँ नंदा का भब्य जागरण किया गया, जहाँ हजारों की संख्या में श्रद्धालु मां नंदा का मेला देखने और प्रसाद ग्रहण करने आते हैं । उत्तराखंड की रक्षा करने वाली देवी,नंदा माँ नंदा को कुमाऊं और गढ़वाल में कुलदेवी के नाम से भी जाना जाता है ।
उत्तराखंड में माँ नंदा देवी महोत्सव हर साल बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। आस्था और भक्ति का प्रतिक यह मेला आठ दिन तक मनाया जाता है। महोत्सव का शुभारम्भ पंचमी तिथि से किया जाता है।
केले के पौंधे द्वारा निर्मित माँ नंदा और सुनंदा की प्राकृत प्रतिमाएं बनाई जाती है।
पुजारियों द्वारा गोधूली के समय पूजन का सामान और श्वेत वस्त्र लेकर केले के झुरमुटों के पास जाते है ।
और पूजा कार्य होने के बाद धूप दीये जलाकर अक्षत मुट्ठी में लेकर कदली स्तम्भ की ओर फेंके जाते हैं।
मान्यता अनुसार सबसे पहले हिलने वाले स्तम्भ से देवी नंदा की प्रतिमा बनाई जाती है और जो स्तम्भ द्वितीय स्थान पर हिलता डुलता है I
उससे सुनंदा का निर्माण किया जाता है बाकि अन्य स्तभों द्वारा देवी शक्तियों के हाथ पैर बनाये जाते हैं।



