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बेलपत्र के नाम से पड़ने वाला गांव आज भी विकास से है कोसो दूर

खबर सागर

 

एक ऐसा गांव जिस क्षेत्र में है लाखों की तादाद में बेलपत्री के पेड़,जो माना जाता है बेलपत्री का गढ़, बेलपत्री के बहुतायात पेड़ क्षेत्र में होने से इस गांव का नाम पड़ा है ।
बेलगढ़ गांव, जिसके पास में है प्रसिद्ध गूलर सिद्ध शिव का मंदिर,जहां सावन के साथ ही महाशिवरात्रि पर कावड़िया चढ़ाते हैं कांवर,लेकिन पवित्र बेलगढ़ गांव आज विकास से है कोसों दूर,एक नल के सहारे 50 घरों की बुझ रही है प्यास।

बता दें कि कॉर्बेट से सटा हुआ रामनगर से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर हल्द्धानी रामनगर स्टेट हाईवे पर स्थित रामनगर वनप्रभाग के अंतर्गत पड़ने वाला बेलगढ़ चौकी के पास स्थित एक ऐसा गांव जो वनग्राम में आता है और जिस गांव का नाम बेलगढ़ है।
इस गांव की अगर इतिहास की बात करें तो इस गांव के आसपास लाखों की तादात में बेल पवित्र बेलपत्र जो शिव भगवान को प्रिय है और सावन में महाशिवरात्रि में व अन्य समय में भी शंकर भगवान को पूजा अर्चना में चढ़ाए जाते हैं ,अर्पित किए जाते हैं ,इस पवित्र बेल के लाखों पेड़ इस क्षेत्र में उपलब्ध है, जिसको देखते हुए इस गांव का नाम बेलगढ़ रखा गया।
1962 में यह गांव यहां पर स्थापित हुआ। इस गांव के ठीक ऊपर प्रसिद्ध गूलर सिद्ध का मंदिर है।
वैसे तो रामनगर में कई प्राचीन मंदिर हैं जो विश्व विख्यात हैं। मगर रामनगर शहर से 1 किलोमीटर दूरी पर एक ऐसा मंदिर है जो पहाड़ी पर स्थित है। इस मंदिर का नाम है गूलर सिद्ध मंदिर। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में जाकर जिसने जो मनोकामना की, वो जरूर पूरी हुई।
गूलर सिद्ध मंदिर की चढ़ाई चढ़ने से पहले बाल सुंदरी का मंदिर भी पड़ता है। कहा जाता है कि एक ऐसी मान्यता है कि सपनों में किसी को मां ने दर्शन दिए, जिसके बाद उसी स्थान पर जाकर पिंडी के रूप में मां ने दर्शन दिये, जो आज बाल सुंदरी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।
रामनगर का एक अकेला मंदिर है जहां पर शिवरात्रि के मौके पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। साथ ही भव्य मेले का आयोजन होता है।
लेकिन रामनगर से किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह बेलगढ़ गांव वन ग्राम में आता है और रोड से लगते इस गांव में न पक्की रोड है और ना ही हर घर नल, पूरे 50 घरों के लिए एक नल लगा हुआ है, उस नल में भी पानी कभी आता है कभी नहीं आता।
कहे तो इस गांव तक आते-आते हांफ गया ‘विकास।

वैसे तो हम आज आधुनिकता के युग 21वीं सदी में जी रहे हैं पर आज भी नैनीताल जिले के रामनगर शहर से 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह पवित्र बेलपत्र के पेड़ों वाला गढ़ गांव बेलगढ गांव पानी और सड़क के लिए तरस रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि पवित्र बिलपत्र के नाम पर इस गांव का नाम पड़ा क्योंकि यहां पर लाखों की तादात में आसपास के क्षेत्र में बेलपत्र के पेड़ मौजूद हैं।
लेकिन इस पवित्र बेलगढ़ गांव में आज भी विकास नहीं आ पाया।
पूर्व ग्राम प्रधान के साथ ही ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव की ओर किसी भी सरकार ने ध्यान नहीं दिया।
वह कहते हैं कि आज भी इस हमारे गांव में पानी का केवल एक नल है और ना सड़क है,उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय विधायक या अन्य नेता जनप्रतिनिधि लोग केवल चुनाव के समय वादे करते हैं और फिर भूल जाते हैं।
वही रामनगर वनप्रभाग के फॉरेस्ट अधिकारी वीरेंद्र पांडे कहते हैं कि यह क्षेत्र रामनगर वनप्रभाग के अंतर्गत आता है वह कहते हैं कि बेलगढ़ बेलपत्र के पेड़ों का गढ़ है, लाखों की तादाद में इस क्षेत्र में बेल के पेड़ मौजूद हैं जिस वजह से क्षेत्र का नाम बेलगढ़ पड़ा।
वही गांव में पानी और सड़क की समस्या को लेकर जब हमने क्षेत्रीय विधायक दीवान सिंह बिष्ट से बात की तो उन्होंने कहा कि स्वेप योजना के तहत पूरे गांव में नल लगने थे उसमें क्या हुआ उसकी मुझे जानकारी नहीं,उन्होंने कहा कि गांव के लोगों ने मेरे से इस विषय में वार्ता भी नही की,
दीवान सिंह बिष्ट ने कहा कि पानी को लेकर जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल लगाने को लेकर मेरे द्वारा प्रयास किए जाएंगे।
साथ ही गांव में रोड को लेकर उन्होंने कहा कि यहां वन विभाग ने रोक लगाई थी, लेकिन उस संबंध में भी और प्रयास करके रोड बनाने का प्रयास किया जाएगा ।

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