
खबर सागर
- कांवड़ियों कों सिर्फ शिव भक्ति की नसीहत अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने दी
धर्म नगरी हरिद्वार में शिव भक्त कावड़िये गंगाजल लेने के लिए करोड़ों की संख्या में आते हैं, चारो तरफ बम बम भोले के जयकारों से धर्मनगरी गुंजयमान है लेकिन इन शिव भक्त कांवड़ियों के बीच में कुछ शरारती हुड़दंगी तत्व शामिल रहते है।
जिससे स्थानीय निवासियों को खासा परेशानी का सामना करना पड़ता है।हरिद्वार के रुड़की से कांवड़ियों के उत्पात का मामला सामने आया है। कावड़ियों ने एक ई-रिक्शा चालक की जमकर पिटाई कर दी। इतना ही नहीं ई-रिक्शा में भी जमकर तोड़फोड़ की।
पुलिसकर्मी भी कांवड़ियों को समझाते रहे और कांवड़ियों का उत्पात जारी रहा। इस दौरान कांवड़ियों ने पुलिसकर्मियों की एक नहीं सुनी। घायल ई-रिक्शा चालक को अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है।
घटना का वीडियो सामने आया है। इस मामले को लेकर हरिद्वार एसएसपी का कहना है कि हरिद्वार पुलिस शिव भक्त कावड़ियों की सुरक्षा के लिए तैनात है कोई घटना होती है तो तुरंत पुलिस कों सम्पर्क करें ।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने कांवड़ियों से अपील की है कि जो शिव भक्त कांवड़ लेने आए हैं उनको सिर्फ भगवान शिव की भक्ति करनी चाहिए ना कि किसी वाद विवाद में पढ़ना चाहिए।
हरिद्वार एसएसपी प्रमेन्द सिंह डोभाल ने इस पूरे मामले में जानकारी देते हुए कहा कि मंगलौर कोतवाली क्षेत्र ग्राम लिब्बरेडी में संजय कुमार के द्वारा पुलिस को सूचना दी गई कि आज उसकी ई-रिक्शा से एक कावड़िए को टक्कर लग गई थी। कांवड़ियों को इससे चोट भी नहीं आई और कांवड़ खंडित भी नहीं हुई। इसके बाद भी कांवड़िए ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर ई-रिक्शा चालक के साथ मारपीट की।
उन्होंने ई-रिक्शा में भी तोड़फोड़ भी की है। पुलिस ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए अज्ञात कावडिए के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और उन लोगों को पहचान की जा रही है।
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्रपूरी ने अपने बयान में कहा कि हरिद्वार में हर साल कावड़ मेले का आयोजन किया जाता है और लाखों करोड़ों की संख्या में शिव भक्त हरिद्वार जल लेने के लिए आते हैं और हरसाल विवाद भी होता है लेकिन इस साल एक के बाद एक विवाद सामने आ रहा है।
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष मंहत रविंद्र पूरी ने हरिद्वार आए शिव भक्तों से अपील करते हुए कहा कि जो शिव भक्त कावड़िया हरिद्वार जल लेने के लिए आए हैं उनको भक्ति भाव और श्रद्धा से हरिद्वार से कावड़ यात्रा की शुरुआत करनी चाहिए और किसी भी तहर से वाद विवाद से बचना चाहिए।



