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वनों में आग लगने का मुख्य कारण पेड़ की सूखी पत्तियां यानी पिरुल

खबर सागर

पौड़ी में वनाग्नि का मुख्य कारण बनने वाले चीड़ के पेड़ की सूखी पत्तियां यानी पिरुल के साथ ही बांज की पत्तियों को वन विभाग एकत्रित कर अब खाद बनाने के प्रयोग में ला रहा है ।
जिसे सड़को से वन विभाग की टीम एकत्रित कर वन विभाग की नर्सरी तक पहुंचा रही है ।
इससे फायदा ये होगा की सड़को के इर्द गिर्द पड़ी सूखी चीड़ की पत्तियां यानी पुरुल और बांज की पत्तियां समय पर साफ होंगी तो वनाग्नि की घटनाओं पर काफी हद तक रोक लग जायेगी साथ ही साथ वन विभाग की नर्सरी में इन पत्तियों से खाद भी बनकर तैयार हो जाएगी ।

जो की वन विभाग की नर्सरी में तैयार हो रही । पौध के लिए फायदेमंद साबित होगी दरअसल इस साल वनाग्नि की घटनाओं से जंगलों में लगाई गई लाखो रुपए की वन संपदा को खासा नुकसान पहुंचा है ।

जिसकी भरपाई भी वन विभाग की नर्सरी में तैयार हो रही बांज देवदार, पदम समेत और अन्य प्रजाति की पौध करेगी ।

रेंजधिकारी पौड़ी ललित मोहन ने बताया की मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल, वन संरक्षक गढ़वाल की ये पहल है जिसमें सड़को के इर्द गिर्द पड़े सूखे पिरूल और बांज की पत्तियों को एकत्रित कर खाद तैयार की जा रही है।

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