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वैदिक विवाह स्थल के रूप में विकसित होने लगा ओकारेश्वर मन्दिर

खबर सागर

बद्री केदार मन्दिर समिति अध्यक्ष अजेन्द्र अजय व समिति के सभी पदाधिकारियों ,सदस्यों व अधिकारियों के अथक प्रयासों से भगवान केदारनाथ का शीतकालीन गद्दी स्थल ओकारेश्वर मन्दिर व द्वापर युग में ऊषा अनिरुद्ध की शादी का विवाह मण्डप धीरे – धीरे वैदिक विवाह स्थल के रूप में विकसित होने लगा है ।

बुधवार को दिल्ली के नव दम्पति ने ओकारेश्वर मन्दिर परिसर में विराजमान ऊषा अनिरुद्ध के विवाह मण्डप में सात फेरे लेकर नव दामपत्य सूत्र में बधे I

बता दे कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण के पौत्र व प्रधुम्न के पुत्र अनिरुद्ध व वाणासुर की पुत्री ऊषा का विवाह मण्डप युगों से दोनों की शादी का साक्ष्य रहा है । वेद पुराणों में वर्णित है कि वाणासुर की पुत्री ऊषा ओकारेश्वर मन्दिर में शिक्षा ग्रहण करती थी ।

तथा एक दिन अनिरुद्ध ऊषा के सपने में आया तथा ऊषा ने सपने की बात अपनी सहेली चित्रलेखा से कही ।
सपने के आधार पर चित्रलेखा ने द्वापर युग के कई राजकुमारो की फोटो का चित्रांकन किया तो अनिरुद्ध का फोटो देखकर कर ऊषा ने चित्रलेखा से कहा कि यही मेरे सपनो का दुलारा है! समय पर अनिरुद्ध को पलंग सहित द्वारिका से ऊखीमठ पहुंचाया गया ।

कुछ समय बाद भगवान श्रीकृष्ण भी अपने पौत्र अनिरुद्ध की ढूंढ – खोज में ऊखीमठ पहुंचे तथा वाणासुर से सन्धि के बाद ओकारेश्वर मन्दिर परिसर में ऊषा अनिरुद्ध का विवाह समपन्न हुआ! ऊषा अनिरुद्ध का विवाह मण्डप आज भी दोनों की शादी का साक्षी बना हुआ है ।
विगत दिनों मन्दिर समिति द्वारा ओकारेश्वर मन्दिर को वैदिक विवाह स्थल के रूप में विकसित करने की पहल की गयी ।
तथा गुरुवार को रोहणी दिल्ली निवासी लखन व बुराड़ी दिल्ली निवासी संगीता ने ओकारेश्वर मन्दिर पहुंचकर पूजा – अर्चना कर ऊषा अनिरुद्ध के विवाह मण्डप में सात फेरे लेकर नव दामपत्य सूत्र में बंधकर अनूठी मिसाल पेश की ।

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