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दिनेशपुर में नील चड़क पूजा हर्ष उल्लास के साथ मनाई

खबर सागर

धर्म के साथ रहस्य और आश्चर्यचकित करने वाले संत है कि यहां धर्म के नाम पर आज भी कई ऐसी विधाओं व अनूठी परम्परा को आश्चर्य के क्रम में आज भी देखी जा रही हैं।

चैत्र माह के अंतिम दिन दिनेशपुर नगर पंचायत क्षेत्र के सीमाअंतर्गत शिव धाम में बड़े हर्षो उल्लास के साथ चड़क पूजा मनाई जाती है।

बता दें कि बंगाल के नव वर्ष पहले वैशाख के 1 दिन पहले आयोजित होने वाली चड़क पूजा से पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बाद अब उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के दिनेशपुर और शक्तिफार्म का लोक पर्व बन गया है ।
जो क्षेत्र के अंतिम दिन मनाया जाता है।
यदि कोई आपकी पीठ में छेद करके उसे लहू लुहान कर दे और उसमें हक लगाकर आपको टंग दे तो आपको कैसा लगेगा जाहिर है आप ऐसा करने वाली व्यक्ति को रोक देंगे ।
हर संभव प्रयास करेंगे कि ऐसा न हो क्योंकि इससे आपको असह्य पीड़ा होगी और आप उसे बर्दाश्त ही नहीं कर पाएंगे ‘
यदि हम आपसे यह कहे कि ऐसा ही कुछ नजर आपको पश्चिम बंगाल के बाद अब उधम सिंह नगर जिले की शक्ति फार्म और दिनेशपुर में देखने को मिलेगा तो शायद आप आश्चर्य से भर जायेगे और यह सोचे कि ऐसा क्यों किया जाता है ।
इस पूजा को नील पूजा के नाम से भी जाना जाता है भगवान शिव को समर्पित इस पूजा के विषय में यहां के लोगों का मानना है कि पूजा के बाद भगवान सारे दुखों को दूर करके समृद्धि यश वैभव और खुशहाली देते हैं भगवान शिव को संतुष्ट करना है इस दौरान क्षेत्र के लोग अलग-अलग गांव में जाकर तेल नमक चावल और पैसे लेकर आते हैं ।

इन सभी का इस्तेमाल भगवान शिव को सजाने के लिए किया जाता है भगवान शिव को संतुष्ट करने के लिए यह मानव चड़क भी बनाते हैं जिसमें उनकी पीठ पर लोहे के हक फंसा कर इन्हें रस्सी से घुमाया जाता है क्या यह बड़ा रिस्की होता है ।

इसमें व्यक्ति की जान तक जा सकती है तो यदि आपको यह अनोखी पूजा देखनी है तो आज ही पश्चिम बंगाल या उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले की शक्तिफार्म या दिनेशपुर मनाने के बाद आज हर्ष उल्लास के साथ समापन हुई ।

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