
खबर सागर
बैशाखी माह आरम्भ होने के बाद जौनपुर में पौराणिक रिति रिवाज, भैष भूषा व लोक संस्कृति पर आधारित मेला थैलू 14 अप्रैल से आगाज हो रहे है । जिसमें क्षेत्र वासीयों द्वारा जोर शोर से तैयारियां शुरु कर दी है।
जौनपुर क्षेत्र में लोक संस्कृति का केन्द्र मेला थैलू का विशेष महत्व माना जाता है। जहां पूर्व समय में मेले ही एक दुसरे का मिलाप व लोक संस्कृति का प्रदान – प्रदान का मुख्य होता था ।
लेकिन अब धीरे धीरे पाश्चात संस्कृति की ओर जाने से इनका महत्व में कम देखी जा रही है। फिर भी नैनबाग क्षेत्र में आज भी मेला थैलू को लोगो बेखूबी से मनाने की परम्परा व धरोवर के रूप में जीवित व संजोय हुए है।
जिसमें आयोजित होने वाले मेले 2 गते ( 14 ) अप्रैल को नैनबाग के स्थान श्रीकोट में । 3 गते (15) अप्रैल को बिरोड के डांडा नागथात में 5 गते (17) अप्रैल को तिर्स बाडासारी ,18 अप्रैल को पर्यटक स्थल त्याडा भद्रराज होगा ।
20 अप्रैल को ग्याणी – जाखधार में 21 अप्रैल को परोगी आयोजित होगा । इसके अलाव पीपल खेत सहित अंतिम मेला डांगा थत्यूड में समापन होता है।
सोवत सिंह कैन्तुर व दीवान सिंह रावत का कहना है कि वैसै तो हाइटेक युग के चलते मेला त्यौहार मोबाईल व पाश्चात संस्कृति के भेंट चढ गए ।
फिर भी नैनबाग क्षेत्र में मेले व त्यौहार कुछ हद तक धरोवर के रूप में आज भी कायम होने पर धूमधाम मनाते आ रहे है ।



