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राजकीय महाविद्यालय नैनबाग में फर्जी प्रवेश छात्रा को रोका परीक्षा से

खबर सागर

राजकीय महाविद्यालय नैनबाग में फर्जी प्रवेश छात्रा को रोका परीक्षा से

राजकीय महाविद्यालय नैनबाग में पिछले वर्ष 2025 में एम.ए. प्रवेश लेने के बाद परीक्षा में बैठने से रोक देने पर फर्जी प्रवेश जैसे प्रकरण प्रकाश में आया है। जिस पर अभिभावकों ने इस घोर लापरवाही व गंभीर ममाले पर शासन प्रशासन से जांच कर दोषियों के प्रति सक्त कार्यवाही की मांग की है।

राजकीय महाविद्यालय नैनबाग ने छात्र – पूनम को एम.ए. प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश दिया गया । और फीस व रजिस्ट्रेशन शुल्क भी जमा कराया गया, लेकिन परीक्षा फॉर्म नहीं भरा गया, साथ कालेज प्रशासन द्वारा सर्मथ पोर्टल पर उपलोड नही किया गया ।
गजब कि बात है कि छात्रा को परीक्षा में बैठने न देने पर छात्र इस तरह की घोर लापरवाही कालेज प्रशासन द्वारा किए जाने पर कॉलेज की प्रवेश जांच प्रक्रिया और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए है।जिससे फर्जीवाडा प्रतित होता है।

आज छात्रा के अभिभावक को पता चलने पर कालेंज में पंहुचे और जानकारी चाही कि एक साल पहले प्रदेश व पीस, एडमिट कार्ड और लगातार कालेंज आने पर भी परीक्षा नही दिलाई गई ।
यही नही कॉलेज प्रशासन द्वारा एक साल तक इस सम्बध में कोई पत्राचार नही करने पर अभिभावकों में भारी आक्रोश में है।
इतनी बडी लापरवाही व गैर जिम्मेदारी के चलते छात्रा के एक साल का भविष्य को अधर में लटकारा रखा ।
जिससे छात्र पूरी तरह से मानसिक तनाव और सदमे में आ गई है ।
यदि छात्रा निर्धारित पात्रता पूरी नहीं करती थी तो प्रवेश के समय उसकी मार्कशीट और विषयों की जांच क्यों नहीं की गई ।
फीस व प्रवेश प्रक्रिया के दौरान प्रोस्पेक्टर/प्रवेश विवरणिका जारी नहीं किए जाने से भी छात्रों को विषय चयन, पात्रता और नियमों की सही जानकारी चस्पा नही कि गई । साथ ही
कालेंज प्रशासन द्वारा कोई रूचीबद्व तरीके से संज्ञान नही, लिया गया ।
छात्रों का कहना है कि यदि एम.ए. में विषय वार पात्रता का कोई नियम था तो इसकी जानकारी प्रवेश से पहले स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए थी, ताकि विद्यार्थियों का समय और पैसा बर्बाद न हो। जब कि कालेंज में पठन के लिए आती रही ।

अभिभावक ने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़ी प्रवेश प्रक्रिया में ऐसी घोर लापरवाही गंभीर मामला है। और एक साल तक कालेंज प्रशासन द्वारा कोई पत्राचार न करने से आज यह स्थिती सामने आई है।
फीस लेने के बाद परीक्षा फॉर्म रोकना छात्रहित में उचित नहीं है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए ।
जब किसी कालेंज प्रशासन से अभिभावक यही पूछते रहे की 1 साल तक पत्राचार क्यों नहीं किया, जिससे कि छात्र का भविष्य व भावनाओं के साथ खिवाड़ क्यों किया गया ।
जिस पर प्राचार्य द्वारा सारी लगतीयां व लापरवाही विश्वविद्यालय चंबा कॉलेज प्रशासन द्वारा कि गई है। जिस पर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

वही प्राचार्य मुकेश कुमार का कहना है कि वर्ष 2025 छात्रा पूनम
एम.ए. प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश दिया, जैसे मेरे संज्ञान में आया तो एक साल पहले पत्राचार किया, जिसमें विश्वविद्यालय द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया, जैसे परीक्षा फार्म व सर्मथ पोर्टल पर भी अपलोट नही हुआ।

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