
खबर सागर
सेन्चुरी वन अधिनियम बना क्षेत्र के चहुंमुखी विकास में बाधक
मदमहेश्वर धाम सहित यात्रा पड़ावों के चहुंमुखी विकास में केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग का सेन्चुरी वन अधिनियम बाधक बना हुआ है परिणाम स्वरूप मदमहेश्वर धाम सहित यात्रा पड़ावों में समस्याओं का अम्बार लगा हुआ है।
यदि प्रदेश सरकार की पहल पर केन्द्र सरकार मदमहेश्वर धाम सहित विभिन्न यात्रा पड़ावों पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की पहल करती है तो मदमहेश्वर धाम आने वाले तीर्थ यात्रियों की संख्या में भारी इजाफा होगा।
जिससे मदमहेश्वर घाटी के तीर्थाटन व पर्यटन व्यवसाय में इजाफा हो सकता है तथा मदमहेश्वर – पाण्डव सेरा – नन्दी कुण्ड – रूद्रनाथ पैदल ट्रैक विकसित हो सकता है।
बता दे कि मदमहेश्वर धाम सहित यात्रा पड़ाव बनातोली, खटारा, बनातोली, मैखम्भा, कूनचटटी यात्रा पड़ावों के भूभाग पर केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग का सेन्चुरी वन अधिनियम लागू होने से यात्रा पड़ावों पर यातायात, विधुत, दूर संचार जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव होने से मदमहेश्वर धाम में सीमित संख्या में तीर्थ यात्रियों का आवागमन होता है।
भले ही तीर्थ यात्री मदमहेश्वर धाम की हसीन वादियों से रुबरु होने के लिए कई रात्रि प्रवास करने के लिए आता है ।
मगर मदमहेश्वर धाम सहित विभिन्न यात्रा पड़ावों पर ऊर्जा प्रदेश में विधुत व संचार युग में मोबाइल नेटवर्क न होने से तीर्थ यात्री एक – दो रात्रि प्रवास कर मदमहेश्वर घाटी को अलविदा कह देता है ।



